मप्र के मंडला में हुए कथित एनकाउंटर के खिलाफ शुक्रवार को कांग्रेस ने प्रदर्शन कर पुलिस अधिकारीयों के खिलाफ मामला दर्ज करने की मांग की है। कलेक्ट्रेट पहुंचे पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने राष्ट्रपति के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा।
9 मार्च को मंडला जिले में हुए पुलिस नक्सली मुठभेड़ को लेकर विधानसभा में हंगामा करने के बाद कांग्रेस मुखर होकर सड़क में भी प्रदर्शन करने लगी है पोस्टमार्टम के बाद शव को परिजनों को सौंपने के बाद से कांग्रेस के जनप्रतिनिधि इस मामले पर पुलिस पर आरोप लगाते रहे हैं। विपक्षी और परिवार के आरोपों को बल जब मिल गया जब प्रशासन ने मृतक की पत्नी को दस लाख रुपए की सहायता राशी दी।
कांग्रेस की मांग पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई हो
राष्ट्रपति के नाम सौंपें ज्ञापन में आदिवासी कांग्रेस ने मांग की है कि हाई कोर्ट के जज की निगरानी में 5 सदस्यीय कमेटी बनाया जाए जिसमें एक आदिवासी जज और पक्ष ,विपक्ष के आदिवासी विधायक शामिल हों , घटना से जुड़े थाना प्रभारी, पुलिस अधीक्षक और हॉक फोर्स के अधिकारियों को तत्काल निलंबित किया जाए।
पीड़ित परिवार को 2 करोड़ रुपये की सहायता राशि दी जाए, परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए और बच्चों की शिक्षा एवं भरण-पोषण की पूरी जिम्मेदारी सरकार उठाए। साथ ही नक्सलियों की मददगार बताकर जिन्हें गिरफ्तार किया गया है उन्हें तुरंत रिहा किया जाए।
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कांग्रेस के जिला अध्यक्ष ने कहा कि कल प्रशासन ने कहा कि मृतक के परिवार को दस लाख की सहायता राशी दी गई है। इस मदद ने साबित कर दिया कि मारा गया व्यक्ति नक्सली नहीं था। प्रशासन ने मजाक बना रखा है कभी नक्सली , कभी मददगार, रसद पहुंचाने वाला बता रहे हैं।
आदिवासी कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष चंदा सरवटे ने कहा कि गरीब आदिवासी मोहन सरकार के कारण मारा जा रहा है और मारने वाले खुलें में घूम रहे हैं। अगर न्याय नहीं मिला तो यह प्रदर्शन दिल्ली तक जाएगा।
भाजपा ने आदिवासीयों को लुभाने के लिए भले ही एक आदिवासी को राष्ट्रपति बना दिया हो मगर जमीन पर आदिवासी का लगातार शोषण कर रही है।
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